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अब यही करना रह गया था !

Posted On: 10 Feb, 2012 Others में

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karnataka assemblyइस समय देश में चुनावी माहौल है. देश की सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों ने इस माहौल में अपने आप को रंग दिया है. आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है. पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ बोलने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ रही हैं. कहीं से कोई भी मुद्दा यदि बाहर आता है तो राजनीतिक दल उसको राजनीतिक रूप देने में पीछे नहीं हटते. लेकिन फिलहाल जो मुद्दा अभी सामने आया है वह भारतीय जनता पार्टी के लिए गले की फांस बनता जा रहा है. कर्नाटक विधानसभा सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी के विधायकों द्वारा अश्लील वीडियो देखना जहां कांग्रेस के लिए हमला करने का मौका देता है वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव में एक बुरे सपने की तरह है. पहले से ही कर्नाटक की करतूतों से बीजेपी अपने आप को पूरी तरह से धो नहीं पाई कि उनके सामने एक और मुद्दा उसकी सेहत को बिगाड़ सकता है.


लोकतंत्र का मंदिर अपने बुरे कामों के लिए प्रसिद्ध है और इसका भी अपना एक अलग इतिहास है. जनता अपनी तरफ से साफ छवि के नेता को इस मंदिर में भेजती है ताकि वह देश के हित के लिए कुछ कानून बना सके लेकिन अच्छे कानून तो बनना दूर नेता वहां पहुंच कर हैवानियत का रूख अपना लेते हैं.


एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए अश्लील भाषा का प्रयोग करना लोकतंत्र के मंदिर में आम हो चुका है जिसे इस मंदिर के प्रत्येक सत्र में सुना और देखा जा सकता है. चप्पल-जूते फेंकना, कुर्सियों और मेजों की तोड़फोड़ करके कई बार इन्होंने हमारे मंदिर को शर्मशार किया है. अध्यक्ष के उपर जुबानी और शारीरिक हमले भी इसका एक नया रूप है. यहां तक तो ठीक है लेकिन अब तो हद हो गई जब इन्होंने अपने विशेषाधिकारों का इस तरह से प्रयोग किया कि लोकतंत्र के मंदिर को वेश्यालय बना दिया. इस पर मुझे ओम पुरी की वह टिप्पणी याद आ गई जो उन्होंने रामलीला मैदान में कही थी. उन्होंने इन नेताओं को “गंवार” और “नालायक” का दर्जा दिया था जिससे हमारे कु’माननीय’ नेता काफी तिलमिला गए थे. लेकिन मेरा मानना है कि उपरोक्त शब्द का इस्तेमाल करके ओम पुरी ने उनका सम्मान किया था.


विधानसभा या संसद में इनकी जो हरकत है वह किसी को बताने या फिर दिखाने लायक नहीं है. ना जानकर भी सारी दुनिया इनके करतूतों से भलीभांति परिचित है. यह नेता चुनाव में जीतने के लिए बेशर्मी की सारी हदें पार कर देते हैं. जब देश की छवि की बात आती है वहां भी अपने बुरे कामों से देश को अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते. अधिकतर ऐसा देखने में आया है कि जो काम इन्हें दिया गया है उससे कोसों दूर हटकर यह गलत कामों में संलिप्त होते हैं. अब यहां यह समस्या आती है कि न बर्दाश्त किए जाने वाले इनके बुरे आचरण से हमारी आम जनता कैसे निपटे. इन्हें वोट देते समय इनकी कौन सी योग्यता वह अपने दिमाग में रखे.


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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 30, 2012

अच्छा आलेख | बधाई !!

dineshaastik के द्वारा
February 20, 2012

जमुना जी नमस्कार, भाई इनका बस चले तो ये उस मंदिर को चकला घर बना दें। ंभ्रष्टाचार का अड़्डा तो बना ही दिया है।

    Jamuna के द्वारा
    February 20, 2012

    दिनेश जी, इनके बस में बहुत ही यहां बना भी देंगे. संसद में हर नई करतूत देखने को मिल रहा है. 

abhishektripathi के द्वारा
February 13, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

abodhbaalak के द्वारा
February 11, 2012

जमुना जी कहीं पढ़ा तो बहुत पहले की किसी को चोर डाकू, हत्यारा, बलात्कारी धोकेबाज़ आदि कहना तो ये सब न कहके केवल नेता कह दो, मेरे ख्याल से ये पूरी तरह से ………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Jamuna के द्वारा
    February 13, 2012

    आबोध बालक जी, सही कहा आपने,प्रतिक्रिया देने के लिए आपको धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
February 11, 2012

जमुना जी , सादर नमस्कार ! नेताओं को ओम पुरी या किसी और के कुछ कह देने से कोई फर्क नहीं पड़ता ! भगवन जाने ये किस मिटटी के बने होते हैं ? शायद भगवन भी ये सोचता होगा की ये प्रजाति मैंने तो बने नहीं फिर कहाँ से उत्पत्ति हुई ? बहुत सुन्दर और प्रशंशनीय लेख ! आपका ध्यान चाहूँगा ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/07

    Jamuna के द्वारा
    February 11, 2012

    योगी जी इन्होंने राजनीति को इतनी सस्ती और घटिया, और गरीब बना दिया है. जिस पर किसी भी भारतीय को गर्व नहीं होता, प्रतिक्रिया देने के लिए बधाई.

    yogi sarswat के द्वारा
    February 11, 2012

    जमुना जी , अभी आपकी किसी को दी गई प्रतिक्रिया देख रहा था , एन्कोउन्टर पर ! अगर ये मान भी लिया जाये की सोनिया रोई थी तो क्या हम ये मान के चलें की राजीव जी की हत्या हुई तो वो हंसी थी ? आपकी अपने लेख पर प्रतिक्रिया का इंतज़ार है !

    Jamuna के द्वारा
    February 11, 2012

    योगी जी, राजनीति में त्याग आम नहीं बहुत ही पुरानी है.  इस त्याग में कोई अपना स्वार्थ देखता है तो कोई नहीं. किसी बात को लेकर रोते रहना, उसको अपने पल्लू में बाधे रखना राजनीति के आत्मा में नहीं है. अब चाहे वह राजीव गांधी और उनके भाई की मृत्यू क्यो न हो.


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