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महाशतक पर सचिन का अंतिम दांव

Posted On: 1 Mar, 2012 sports mail में

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sachin tendulkarएक चुनावी अभियान की तरह सचिन तेंदुलकर का भी एक अभियान है जिसे हम महाशतक के अभियान के नाम से जानते है. इस अभियान पर अपनी विजय पताका लहराने के लिए सचिन पिछले एक साल से लगे हैं लेकिन कामयाब होते नहीं दिख रहे. अनेको टेस्ट और वनडे मैच खेलने के बाद भी सचिन अभी भी महाशतक से महरूम है. उनके समर्थकों के साथ-साथ उनकी प्यास हर सीरीज में जगती है लेकिन सीरीज के सीरीज निकल जाते हैं लेकिन उनकी प्यास बुझ नहीं पाती.


अब ऐसा सिलसिला बन चुका हर अगामी सीरिज के साथ उनके समर्थकों को उनसे महाशतक की उम्मीद लगी रहती है. सचिन ने भी तय कर लिया है कि आराम को बाय-बाय करते हुए टेस्ट हो या वनडे किसी भी सीरीज में वह शतक लगा कर रहेंगे. माना जा रहा है आगामी एशिया कप में सचिन ने स्वयं ही इच्छा जाहिर की है कि वह इस टूर्नामेंट में खेलेंगे ताकि महाशतक के सिरदर्द को इसी टूर्नामेंट में दूर किया जा सके. उपर से खबरे आ रही हैं कि मास्टर ब्लास्टर के लिए एशिया कप वनडे का अंतिम पड़ाव है. इसके बाद वह वनडे से अलविदा ले लेंगे.


ऐसे में सवाल यह उठता है क्या सचिन महाशतक के दाबाव में आकर इस तरह का फैसला ले रहे है. इस खिलाड़ी ने अपने जीवन में क्रिकेट के अलावा कुछ भी नहीं सोचा, दिनरात अपने आप को क्रिकेट में झोकता रहा, लगभग ढ़ाई दशक अपने आप को क्रिकेट के लिए समर्पित कर देना और अपने बेहतर प्रदर्शन की बदौलत भारत में क्रिकेट का प्रयाय बनना इसकी एक पहचान बन चुकी है. ऐसे यह महान और अद्धुतीय खिलाड़ी अपने कॅरियर के अंतिम पड़ाव पर महाशतक के डर से वनडे क्रिकेट छोड़ना का फैसला ले रहा है यह बात हजम नहीं हो रही.


आलोचकों का काम ही है कि सफलतम लोगों की आलोचना करके अपनी रोटी सेकना, अपने आप को किसी तरह से सुर्खियों में लाना उनका धर्म बन चुका है. लेकिन यहां पर सचिन को दूसरों के धर्म की चिंता न करके स्वयं के धर्म अर्थात क्रिकेट धर्म की चिंता करना चाहिए. अभी इस समय युवा टीम की बात की जा रही है एक दो खिलाड़ी को छोड़कर ऐसा कौन सा खिलाड़ी है जो वर्तमान सीरीज में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. यह खिलाड़ी अपने बूरे प्रदर्शन दौर से गुजर रहे हैं, इसका मतलब इन्हे भी सचिन के साथ क्रिकेट को अलविदा कह देना चाहिए.


सचिन क्रिकेट के लिए बने हैं. उन्हें कुछ साल और क्रिकेट को अपनी सेवा देनी चाहिए. क्रिकेट को छोड़ने का फैसला किसी के दबाव में नहीं होनी चाहिए. सबके जीवन में बुरे प्रदर्शन का दौर जरूर आता और एक बार नहीं कई बार आता है तो इसका मतलब यह नहीं कि हार कर जीना ही छोड़ दिया जाए. सचिन के लिए क्रिकेट उनकी जिन्दगी है इसलिए इस पर फैसला लेने से पहले एक बार जरूर विचार कर लेना चाहिए.


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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chandanrai के द्वारा
March 11, 2012

नमस्कार जमुना जी, मै एस ब्रह्माण्ड मै सचिन का सबसे बड़ा फैन हूँ . मेरे ब्लॉग पर जरूर आइयेगा http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

    Jamuna के द्वारा
    March 12, 2012

    अपने प्रतिक्रिया दी उसके आपको धन्यवाद….

dineshaastik के द्वारा
March 5, 2012

जमुना जी मेरा तो यही मानना है कि सचिन यथा शीघ्र संयास ले लेना चाहिये। सभी का समय होता है। और हर चीज समय पर ही सही लगती है। कृपया अपनी समालोचात्मक प्रतिक्रिया से अनुग्रहीत करें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/?p=60&preview=trueक्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

    Jamuna के द्वारा
    March 12, 2012

    संन्यास लेना उनका निर्णय है. संन्यसा लेने के लिए उन्होने अपना समय निर्धारित कर रखा होगा. वह एक महान खिलाड़ी इसलिए संन्यास को लेकर उन पर हम दबाव नहीं बना सकते है. एक तरफ तो हम उन्हें भारत रत्न देने की बात करते हैं दूसरी तरफ उनके साथ देश के रत्न जैसा व्यवहार भी नहीं करते

Kumar Gaurav के द्वारा
March 3, 2012

नमस्कार जमुना जी सचिन से लोगों की भावनाएं जुडी हैं. लोग सचिन के मामले में भावुक हो जाते हैं. सचिन को बिलकुल कुछ साल और खेलना चाहिए. मेरे ब्लॉग पर जरूर आइयेगा.

    Jamuna के द्वारा
    March 5, 2012

    प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
March 2, 2012

जमुना जी नमस्कार ! बिलकुल आपकी बात से सहमत हूँ , सचिन सिर्फ क्रिकेट के लिए ही बने हैं ! कभी कभी ऐसा दौर आ जाता है जब व्यक्ति का आत्मविश्वास दोल जाता है किन्तु भगवन से प्रार्थना की जनि चाहिए की वो क्रिकेट के भगवन को अपना १०० वा शतक बनाने की शक्ति दे ! लेकिन इससे एक नुकसान होगा जमुना जी , की अगर सचिन का १०० वा शतक बन गया तो वो जल्दी ही सन्यास ले लेंगे और फिर हम एक महान खिलाडी को खेलते हुए नहीं देख पाएंगे ? आपके अपने लेख पर विचार चाहूँगा ! कृपया गौर करें ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/23

    Jamuna के द्वारा
    March 3, 2012

    अच्छा प्रदर्शन करते हुए कोई खिलाडी यदि अपने खेल से संन्यास लेता है. तो उस समय उसकी अनेकों तारे वाली महानता में एक और तारे जुड़ जाता है. तो देखने वालों को भी वह नया तारा अच्छा लगता है. मैने अपनी बात में कहा है कि सचिन मीडिया और दूसरे खिलाड़ी के कहने पर संन्यास न ले. अगर उनका 100वां शतक लग भी जाता है तो उस समय उनके निर्णय पर निर्भर करता है कि वह संन्यास ले की ना. योगि जी मेरा ब्लॉग पढ़ा उसके लिए आपको तहदिल से धन्यवाद…… उम्मीद करता हु मेरे विचार पर आप भी कुछ अपनी टिप्ण्णियां देंगे.


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