खास बात

जिंदगी की जद्दोजहद पर आधारित विचार

14 Posts

62 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8248 postid : 67

समाजवादी पार्टी के चरित्र में दाग

Posted On: 18 Jun, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

mulayam u turnराष्ट्रपति चुनाव को लेकर जो देश में गहमागहमी चल रही है उससे तो देख कर यही बात ध्यान में आती कि ‘एक अनार सौ बिमार’. अर्थात पद एक है लेकिन उस पर दांवपेच लगाने वाले सैकड़ों हैं. सबको अपनी-अपनी पसंद का राष्ट्रपति चाहिए अगर किसी की पसंद वरीयता नहीं दी जाती तो वह विरोध करने लगता है. लेकिन इस राजनीति में इसका भी उपाय है कि यदि को छोटी राजनीति पार्टी किसी बड़ी पार्टी के उम्मीदवार को पसंद नहीं करता तो उसे अपने पाले में लेने के लिए उस पर ढेरों पैसे की बारिश की जाती है.


कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के सुर अलग थे. वह राष्ट्रपति ए.पी.जे अबदुल कलाम को महामहिम बनाने के लिए ममता के समर्थन में आ गए थे और उन्ही के सुर में सुर मिलाने लगे थे. लेकिन अचानक उत्तर प्रदेश की इस पार्टी को कांग्रेस की तरफ से ऐसा क्या मिल गया कि इसने सभी वादों को भूलते हुए आखिरी वक्त में ममता को धोखा देकर कांग्रेस को समर्थन दे दिया.


वैसे भी यह पार्टी जब से उत्तर प्रदेश की सरकार में आई है यह जमीन पर कम आसमान पर ज्यादा दिखाई दे रही है. आजकल मुलायम जी भी यूपी में कम और दिल्ली में ज्यादा दिखाई दे रहे हैं. प्रणव को राष्ट्रपति बनाना यह तो कांग्रेस के अपने फंडे है. सोनिया हर तरह से उन कांटों को साफ करती जा रही है जो आने वाले वक्त में उनके बेटे के प्रधानमंत्री बनने में बाधा हो सकती है.


गिरगिट की तरह बदलने वाली समाजवादी पार्टी का प्रणव को समर्थन देना यह दर्शता है कि इन्हे भारी रकम और कई सारे वादे दिए गए हैं. जो पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव 2012 में कांग्रेस का विरोध करते नहीं थकती थी वह आज कांग्रेस की इतनी हिमायती कैसे हो सकती है. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के लिए यह माना जाता है कि यह बिना फायदे के कोई भी काम नहीं करती तो वह कैसे बिना कुछ लिए प्रणव को समर्थन कर सकती है. एक बात और ध्यान देने योग्य है कि अगर वह पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम को समर्थन देती तो उसके हाथ में न मोटी रकम हाथ लगती और न ही कई सारे वादे. समाजवादी पार्टी का चरित्र ऐसा बनता कि वह पैसे की खातिर किसी को भी बेच सकती है.



Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 1.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
June 18, 2012

आपकी बातों से पूर्णतः सहमत……

    Jamuna के द्वारा
    July 18, 2012

    धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran